Appointment of Contractual (Outsourced) employees in the ASM for the Academic Year 2019-20
श्री रंगलक्ष्मी आदर्श संस्कृत महाविद्यालय

Shri Ranglaxmi Adarsh Sanskrit Mahavidyalaya, Vrindavan, Mathura, is situatedin the heart of the Vrindavan in Mathura district of the state of Uttar Pradesh. Mahavidyalaya was established in the year 1905. On July 01, 1978 our college was selected for Adarsh scheme under Govt. of India. Now our institute is running through Rashtriya Sanskrit Sansthan (Deemed University), New Delhi under the Ministry of Human Resource Development, Govt. of India.

Sanskrit is the most ancient and perfect language among the languages of the world. Its store house of knowledge is an unsurpassed and the most invaluable treasure of the world.

This language is symbol of the secular Indian tradition and thought which has exhibited full freedom in the search of truth, has shown complete tolerance towards spiritual and other kind of experiences of mankind, and has shown catholicity towards universal truth.

It is only institute in Vrindavan which provide facilities for Shastri (Graduation, three years courses), Acharya (Post graduation, two years courses) in various (Sahitya, Vyakaran, Vedanta & Nyaya) Sanskrit disciplines. This college is affiliated to Shri Sampurnanand Sanskrit University, Varanasi and the university provides the courses of study to the students of this college. We have a big library containing approx 7000 books (course books and reference books also) to improve the knowledge of the students and staff of the college. This institute holds unique place in academics.


श्रीरंग लक्ष्मी आदर्श संस्कृत महाविद्यालय, वृन्दावन (मथुरा), उतर भारत में श्रुतिस्मृति सिद्ध विशिष्टाद्वैतदर्शन के प्रचार प्रसार का प्रमुख केन्द्र श्री धाम वृन्दावन स्थित श्रीरंगमंदिर है। इस दिव्य देश (मन्दिर) की स्थापना परमपुज्य अनन्त श्रीविभूषित श्रीरंगदेशिक स्वामी जी महाराज (गोवर्धन पीठाधीश्वर) द्वारा संवत् 1904 में की गई। उनके विद्वत प्रवर शिष्यों- श्री सुदर्शनाचार्य,श्रीलक्ष्मणाचा्य, ्री गोविन्ददास आदि ने নমস্কার महाराजश्री से निवेदन किया कि गुरुमाताजी श्री लक्ष्मीअम्बा की स्मृति सदा बनी रहे और सुधीजनो को श्रुति दुग्धामृत सदा प्राप्त होता रहे इसके लिए एक संस्कृति समुन्नायक संस्कृत महाविद्यालय की माताजी के नाम से स्थापना हो यह हमारी अभिलाषा है। श्रीस्वामीजी महाराज की अनुमति मिलने पर विक्रम संवत् 15०६ में श्रीरंगलक्ष्मी आदर्श संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना की गयी यह महाविद्यालय दि.01.07.1978 से भारत सरकार की आदर्श योजना में गृहीत है। इससे पूर्व

महाविद्यालय उत्तर प्रदेश शासन द्वारा अनुदानित था सञ्चालित था। सर्वप्रथम राजकीय संस्कृत कॉलेज वाराणसी की कक्षायें तदनन्तर वाराणसी संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी की कक्षाएं तत्पश्चात एवं वर्तमान में भी सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी की शास्त्री एवं आचार्य की कक्षायें सञ्चालित हो रही हैं।

इस प्रकार 168 वर्षों से यह महाविद्यालय निरन्तर संस्कृत संस्कृति एवं दर्शन के प्रचार प्रसार में निरत है।

अनेक विशिष्ट विद्वानों ने महाविद्यालय के प्रधानाचार्य (प्राचार्य) पद पर सेवा करते हुए इस महाविद्यालय की वृद्धि की है। इनमें-

श्री सुदर्शनाचार्य शास्त्रीजी महाराज,श्री गरुड़ध्वज आचार्य जी, श्रीअमोलकरामजी शास्त्री, श्रीसीतारामाचार्यजी, श्रीरामलखनजी पाण्डेय, श्रीरामादर्शजी पाण्डेय (इन्हीं के कार्यकाल में भारत सरकार ने महाविद्यालय को आदर्श योजना में गृहीत किया) डॉ.मुरारि लाल जी चतुर्वेदी तथा डॉ. रामकृपाल त्रिपाठी जी भी आदर्श योजनान्तर्गत महाविद्यालय के प्राचार्य पद पर आसीन हुए। इस लम्बे अन्तराल के बीच-बीच में कार्यवाहक प्राचार्य पद पर कार्य करने वाले महानुभाव है-

श्री रासबिहारी लाल जी गोस्वामी, श्री सदाशिव जी शास्त्री, श्री हीरालालजी शास्त्री. डॉ० प्राणगोपालाचार्य जी, आचार्य रामसुदर्शन मिश्रजी आदि। वर्तमान में भी प्रभारी प्राचार्य के रूप में आचार्य रामसुदर्शन मिस्र जी प्राचार्य पद का कार्य सम्पादित कर रहे हैं।

श्रीरंग मंदिर ट्रस्ट बोर्ड के वर्तमान अध्यक्ष अनन्त श्रीविभूषित स्वामी श्री गोर्वधन रंगाचार्यजी महाराज गोवर्धन पीठाधीश्वर के वरदहस्त की छत्र छाया में श्रीगोदारंगमन्नार भगवान की कृपा से वर्तमान समय में यह महाविद्यालय अपने लक्ष्य की ओर निरन्तर अग्रसर हो रहा है। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय से न्याय, व्याकरण, वेदान्त एवं साहित्य विषयक आचार्य पर्यन्त स्थायी मान्यता महाविद्यालय को प्राप्त है।



अध्यक्ष-प्रोo रमेश कुमार पांडेय


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